Jul 27, 2008

अमेरिका गरीबी के शिकंजे में

न्यूयॉर्क, २७ जुलाई-संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि दुनियाभर में जारी आर्थिक संकट के झटके से अकेले उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में एक करोड़ ६० लाख से ज्यादा लोग गरीबी के रसातल में चले जाएँगे।
पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (पीएएचओ) की दो दिन की बैठक का समापन करते हुए संयुक्त राष्ट्र की १३ एजेंसियों के क्षेत्रीय निदेशकों ने दोनों अमेरिकी महादेशों में सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) के मामले में अगले दो साल के दौरान लगातार प्रगति सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कार्रवाई का वादा किया।
एमडीजी के तहत २०१५ तक अनेक सामाजिक और आर्थिक रोगों को उल्लेखनीय रूप से कम करने या उनका उन्मूलन करने का लक्ष्य तय किया गया है। विश्व नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दी शिखर सम्मेलन में ये लक्ष्य तय किए थे।
पीएएचओ की निदेशक मिर्ता रोजेज पेरियागो ने कहा लातीन अमेरिका और कैरिबियाइ क्षेत्र ने एमडीजी पूरा करने में खास तौर पर शिशु मृत्यु, भूख और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्रों में वास्तविक प्रगति की है।
संयुक्त राष्ट्र लातीन अमेरिका एवं कैरिबियाई क्षेत्र आर्थिक आयोग (ईसीएलएसी) की कार्यकारी सचिव एलिसिया बारसेना ने कहा इस क्षेत्र में अब भी १९ करोड़ गरीब लोग हैं, जिनमें से सात करोड़ बहुत ही गरीब हैं।
बारसेना ने आगाह किया कि २००७ के मध्य से शुरू हुई वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते एक करोड़ ६० लाख लोग अत्यंत गरीबी में जाने के लिए बाध्य हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि एक करोड़ ६० लाख लोगों को अत्यंत गरीबी की तरफ धकेलने वाली इस प्रक्रिया के लिए मुख्य रूप से आय में गिरावट निर्यातों में वृद्धि की रफ्तार में आ रही सुस्ती और विनिर्माण निर्यात के निम्न मूल्य जिम्मेदार हैं।
संयुक्त कार्रवाई के तहत संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ खाद्य पदार्थों के उच्च मूल्यों और अन्य बाहरी कारकों के भूख गरीबी और विषमता पर प्रभाव का आकलन करेंगी। इसके लिए साझे आँकड़े और साझे सूचकांकों का उपयोग किया जाएगा।

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