नई दिल्ली, २२ जुलाई- फैसले की घड़ी आ गई है और कुछ ही घंटों में पता चल जाएगा कि यूपीए सरकार बचेगी या जाएगी। वैसे सूत्रों के अनुसार, सत्ता पक्ष ने सरकार बचाने के लिए गणित का जुगाड़ कर लिया है।
सत्ता पक्ष के पाले में फिलहाल २६९ सांसद बताए जा रहे हैं और बताया जा रहा है कि इसके अलावा यूपीए के क्राइसिस मैनेजरों ने एनडीए के १० सांसदों को वोटिंग के दौरान गैरहाज़िर कराने का जुगाड़ कर लिया है। जबकि, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और मिजो नैशनल फ्रंट के सांसद पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे वोटिंग में भाग नहीं लेंगे।
यूपीए नेताओं के हवाले से कहा जा रहा है कि अकाली दल के तीन सांसद, बीजेपी के पांच सांसद और बीजेडी व जेडी (यू) के एक-दो सांसद गैरहाज़िर रह सकते हैं। एक बीजेपी सांसद मंगलवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत करते हुए राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हो गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनके सीने में काफी तेज़ दर्द है।
सूत्रों के अनुसार हवा के बदले हुए रुख को देखते हुए भी कई सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं। उन्हें लगता है कि जीतने वाले खेमे में रहने से ज़्यादा फायदा है। सरकार का पलड़ा भारी होने की खबरों के बाद अजीत सिंह फिर से यूपीए से डील की कोशिश कर रहे हैं। आरएलडी के पास तीन सांसद है। अजीत सिंह ने पहले यूपीए सरकार से लखनऊ हवाई अड्डे का नाम अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखवा लिया। मगर फिर मायावती से डील कर ली। मायावती ने अजित सिंह को यूपी में अच्छा पैकेज देने का भरोसा दिलाया था।
जेडी (एस) के देवगौड़ा के बारे में भी चर्चा है कि वह फिर से अपने कदम पर पुनर्विचार कर रहे हैं। बेटे कुमारस्वामी के दबाव की वजह से यूएनपीए के साथ चले गए थे। पहले शुक्रवार को वह प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें समर्थन का आश्वासन दे आए। कुमारस्वामी के कर्नाटक में बीजेपी से समझौते के समय देवगौड़ा ने बेटे से नाता तोड़ने की धमकी दी थी। सूत्रों के अनुसार अब फिर देवेगौड़ा को बेटे का फैसला गलत लग रहा है।
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