Sep 16, 2008

रेलवे मंत्रालय नें आम आदमी का २००० करोड़ डुबाया

नई दिल्ली, १७ सितम्बर- घाटी में २०१३ तक भारतीय रेल की आवाज गूंजती। घाटी में जिंदगी आसान हो जाती। लेकिन २००३ में शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट अब रुक गया है। पांच साल बाद इस प्रोजेक्ट में रेल मंत्रालय को खामियां ही खामियां नजर आने लगी हैं। अब पुरानी योजना के अनुसार घाटी में रेलवे ट्रैक बिछाना रेलवे को असंभव लगने लगा है। इसलिए रेल मंत्रालय ने एक फरमान जारी कर १३८ किलोमीटर के रेलवे ट्रैक को बेकार बता दिया है। काम रोक दिया गया है।
ऐसे एक दर्जन से च्यादा टनल तैयार किए जा चुके हैं, जिनके भीतर से ट्रेन को गुजरना है। लेकिन रेलवे ने अब रास्ता बदल दिया है। ऐसे में इन सभी टनल की जरूरत खत्म हो गई है। इस काम पर अब तक एक हजार करोड़ रुपए फूंके जा चुके हैं। यही नहीं, इस काम को करा रहे कोंकण रेलवे का टेंडर अगर रद्द होता है तो उसे भी १ हजार करोड़ रुपए का हर्जाना देना होगा। ऊपर से पांच साल भी बर्बाद हुए। १३८ किलोमीटर का ये रेलवे ट्रैक जम्‍मू के कटरा से कश्मीर के काजीकूंज तक जाता है। इसके रास्ते में बहुत से गांव औऱ कस्बे पड़ते हैं। रेलवे का कहना है कि घाटी के पहाड़ी रास्तों में रेल की पटरी को ठीक से जोड़ा नहीं जा सकता। जिन रास्तों से रेल गुजरनी है वो सुरक्षा की दृष्ठि से ठीक नहीं हैं।
पटरियों का घुमावदार होना खतरनाक हो सकता है। इन जगहों पर भूकंप और भूस्खलन दोनों का खतरा है। ये कमियां रेलवे को पांच साल बाद याद आई हैं जबकि इस रेलमार्ग पर १६ बड़े टनल, चार ब्रिज के साथ ही दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब नदी के पुल और एशिया के सबसे ऊंचे अंजी पुल का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।
रेल मंत्रालय के मुख्‍य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) आर।के. गुप्ता ने कहते हैं कि पुराने अधिकारियों से कुछ चूक हुई है, जितनी गंभीरता से इस मामले को देखा जाना चाहिए था, वो नहीं किया गया। रेलवे के लापरवाह अफसरों को काम शुरू करने की इतनी जल्दबाजी थी कि उन्होंने आधी अधूरी परियोजना पर ही काम चालू कर दिया। अब पांच साल बाद इस काम को रोकना पड़ा है। इसके साथ ही उम्‍मीदों की ट्रेन जम्‍मू से कश्मीर पर भी ब्रेक लग गया है। कोंकण रेलवे ने पांच साल पहले ही साफ किया था कि इस प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाना चाहिए तब लापरवाह रेल अफसरों ने खारिज कर दिया था।
अब रेलवे को लगभग दो हजार करोड़ रुपये की चपत लग गई तो तकनीकी खामी बताकर मामले को रफा-दफा करने की साजिश की जा रही है। २००३ में कोंकण रेलवे ने घुमावदार रास्तों की बजाए एक लगभग सीधे ट्रैक पर काम करने का सुझाव दिया था।
कोंकण रेलवे ने इसके फायदे भी गिनाए थे। कटरा से कांजीकूंड की जो दूरी १३८ किलोमीटर है, वो महज ७२ किलोमीटर रह जाएगी। नौ रेलवे स्टेशन के बजाए पांच से ही काम चल जाएगा। जमीन का भी काफी कम अधिग्रहण करना होगा। खास बात इस पर चलने वाली ट्रेन की रफ्‍तार ३० किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर दोगुनी यानी ६० किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। कोंकण रेलवे ने ये भी कहा कि अगर उनके प्रस्ताव को मंजूर किया जाता है तो ११ साल के बजाए आठ साल में ही काम पूरा कर दिया जाएगा और १२,५८२ करोड़ के बजाए इस काम को ८१७७ करोड़ में ही कर दिया जाएगा।
तब रेल मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को ये कह कर खारिज कर दिया कि रेल मार्ग लंबा होने से कई गांवों को इसका फायदा होगा, क्योंकि उन तक ट्रेन पहुंच जाएगी। अब रेलवे को लोगों की फिक्र खत्म हो गई है। क्योंकि पहले ये रेलमार्ग ५० गांव से होकर गुजर रहा था, जो अब महज आठ गांव से ही गुजरेगा। इस प्रोजेक्ट में २ हजार करोड़ रुपए तो डूबेंगे ही। अब इसे पूरा होने में दस साल और लग जाएंगे। ऊपर से इस पर राजनीति और शुरू हो गई है। सांसद और सदस्य, रेलवे संसदीय समिति लाल सिंह कहते हैं कि रेलमार्ग को बदलने नहीं देंगे। जब ट्रेन गांव को नहीं जोड़ेगी तो रेल से फायदा ही क्या है।

भदोही में देश के खुफिया सूत्रों द्वारा गहन पड़ताल की जरूरत

भदोही, १६ सितम्बर-अहमदाबाद, जयपुर, वाराणसी व फैजाबाद में हुये बम विस्फोट का तार परोक्ष-अपरोक्ष रूप से भदोही से जुड़ा था। अहमदाबाद में हुये बम विस्फोट के बाद आजमगढ़ से हुई अबुल बशर की गिरफ्तारी के बाद भदोही निवासी शहबाज हसन को जयपुर बम ब्लास्ट के आरोप में लखनऊ से गिरफ्तार किया गया।
पकड़े गये आरोपियों के बयान के अनुसार पांच लोग पूर्वाचल में संदिग्ध हैं जिनमें तीन भदोही के हैं। पिछले दिनों शहबाज का बयान भी आया था कि दिल्ली में भी बम ब्लास्ट की तैयारी है। आखिर हुआ भी ऐसा ही और दहल उठी दिल्ली।
भदोही न केवल सिमी का गड़ है बल्कि वहां से इन आतंकियों को पनाह सहित भारी पैमाने पर धन भी मुहैया कराए जाने की दबी जुबान से लोगों में चर्चा है लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि अगर प्रशासन गंभीरता पूर्वक बिना किसी दबाव में आए यहाँ गहन पड़ताल करे तो देश में चल रहे इन आतंकवादी गतिविधियों के मद्देनजर शासन-प्रशासन के हांथ बडी कामयाबी लग सकती है ।

इस्तीफा देने का दबाब नहीं: शिवराज पाटिल

नई दिल्ली, 16 सितंबरः गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि सरकार के पास आतंकवादी हमले के बारे में पहले से सूचना थी लेकिन यह सूचना ऐसी नहीं थी कि उस पर कोई कार्यवाही की जा सके साथ ही उन्होंने कहा कि इन विस्फोटों के मद्देनजर उन पर इस्तीफा देने का कोई दबाब नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के बाद लापरवाही का आरोप लगाते हुए भाजपा ने गृहमंत्री शिवराज पाटिल से इस्तीफे की मांग की थी।
एक निजी टेलीविजन को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हमलों की आशंका संबंधी सूचनाएं प्रधानमंत्री को दिए जाने से पूर्व ही केंद्र के पास अपने गुप्तचर सूत्रों से ऐसी खबरें थी, लेकिन खास सूचना उपलब्ध नहीं होने की वजह से कार्रवाई नहीं की जा सकी।
आतंकवाद से सख्ती से नहीं निपट पाने के आरोपों के बीच उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी नेतृत्व का आशीर्वाद प्राप्त है तथा उन पर इस्तीफा देने का कोई दबाब नहीं है।

बराक ओबामा ने पाकिस्तान को लताड़ लगाई

वॉशिंगटन, १६ सितम्बर- अमेरिका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी बराक ओबामा ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह आतंकवाद से लड़ने के लिए अमेरिकी मदद का इस्तेमाल भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी के वास्ते कर रहा है।
ओबामा ने ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि यदि वे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए, तो पाकिस्तान को अमेरिका से प्राप्त भारी-भरकम सैन्य मदद के लिए जवाबदेह बनाएंगे। ओबामा ने कहा कि वे पाकिस्तान पर दबाव बनाएंगे कि वह अफगानिस्तान से लगती पश्चिमी सीमावर्ती इलाके को आतंकवादियों की आरामगाह बनाने के खिलाफ कार्रवाई करे।
ओबामा नें कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान को सैन्य मदद दे रहा है लेकिन वह इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में कर रहा है। उन्होंने ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा मुशर्रफ सरकार को दी गई दस अरब डॉलर की सहायता राशि बर्बाद हो गई, क्योंकि उसे इस बात के लिए जवाबदेह नहीं बनाया गया कि उसने आतंकवादियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की।
उन्होंने कहा कि वे ओसामा बिन लादेन को पकड़ कर रहेंगे और यह काम वे पाकिस्तान की सरजमीं पर सेना भेजे बगैर ही करेंगे। ओबामा ने कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन आतंकवाद के खिलाफ जारी युद्ध से पीछे नहीं हटेगा और पाकिस्तान को कट्टरपन्थियों के हाथों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने कहा कि “हम पाकिस्तान सरकार को और सैन्य मदद देगे लेकिन इसका इस्तेमाल आतंकवादियों के खिलाफ ही करना होगा। हम वहां लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भी मदद देंगे”।

Sep 15, 2008

वित्तीय संकठ से घिरा अमेरिका

अमेरिका, १५ सितम्बर- अमेरिका के चौथे सबसे बड़े निवेश बैंक लेहमन ब्रदर्स के दीवालिया होने से उठा यह संकठ मेरिल लिंच के बिकने से और भयानक हो गया। इसके चलते अमेरिकी आकाश पर बीते कुछ महीनों से छाए सबप्राइम संकट के बादल भी घनीभूत हो गए हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही अमेरिका की दिग्गज बीमा कंपनी एआईजी पर भी इस संकट की छाया पड़ सकती है।
सब प्राइम बाजार के संकट ने ही अमेरिका समेत लगभग पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को मंदी की तरफ धकेल दिया है। इस संकट के विकराल होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के पांच प्रमुख बैंकों में से दो सिटीग्रुप और बेयर स्ट‌र्न्स इसकी चपेट में पहले ही आ चुके हैं।
संकट का ताजा शिकार लेहमन ब्रदर्स बना है। इसके चलते इसको चार अरब डालर का भारी नुकसान हुआ है। बैंक को उबारने की कोशिशें नाकाम होने के बाद लेहमन ने खुद को दीवालिया घोषित कराने के लिए आवेदन करने का फैसला किया है। दीवालिया हो जाने पर १५८ वर्ष पुराने लेहमन बैंक का अंत हो जाएगा। बैंक का मानना है कि दीवालिया घोषित होने से उसकी सहायक कंपनियों को परिचालन जारी रखने का अवसर मिलेगा।
वित्तीय संकट में फंसे लेहमन को खरीदने के लिए किसी भी वित्तीय संस्थान ने रुचि नहीं प्रदर्शित की। एक दिन पहले बैंक को सरकारी मदद देने के लिए बुलाई गई बैठक भी अमेरिकी वित्त मंत्री हेनरी पाल्सन और अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के बीच सहमति न बन पाने के कारण बेनतीजा रही थी।
लेहमन की तुलना में अमेरिका का एक अन्य निवेश बैंक मेरिल लिंच थोड़ा भाग्यशाली रहा और इसको खरीदने के लिए बैंक आफ अमेरिका राजी हो गया। ५० अरब डालर के इस सौदे से विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय सेवा कंपनी का सृजन होगा।
मीडिया रपटों के अनुसार अगर और निवेश नहीं हुआ तो एआईजी भी कुछ ही दिन चल पाएगा। एआईजी के अधिकारी परिसंपत्तिबेचते हुए धन जुटाने या निजी इक्विटी से धन हासिल करने के प्रयास कर रहे हैं।
सब प्राइम बाजार के संकट के कारण अमेरिका के वित्तीय बाजार की दिग्गज कंपनियों को अरबों डालर का चूना लगा है। इसका असर लगभग पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल रहा है। विभिन्न समाचारों में कहा गया है कि स्थिति पर नियंत्रण के लिए फेडरल रिजर्व ने कुछ तात्कालिक कदम उठाए हैं जिनके चलते बैंक तथा प्रतिभूमि फर्मे केंद्रीय बैंक से उधारी ले सकती हैं। इस बीच सिटीग्रुप तथा क्रेडिट सुइस ग्रुप ने अपने धन का इस्तेमाल करते हुए ७० अरब डालर की ऋण सुविधा स्थापित करने पर सहमति जताई है। इसका उपयोग वित्तीय संकट से निपटने में किया जाएगा।

अमरीकी सैनिकों पर पाकिस्तान द्वारा 'हवाई फ़ायरिंग'

पाकिस्तान, १५ सितम्बर- अमरीकी सैनिकों को दक्षिणी वज़ीरिस्तान में घुसने से रोकने के लिए पाकिस्तानी सैनिकों ने हवा में गोलियाँ चलाईं। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी इलाक़ों में सैनिक कार्रवाई को लेकर अमरीका और पाकिस्तान में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है ।
दक्षिणी वज़ीरिस्तान से स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान से लगे अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़े में सात अमरीकी हेलिकॉप्टर उतरे। उसके बाद अमरीकी सैनिकों ने सीमा पार करने की कोशिश की । उसके बाद ही पाकिस्तानी सैनिकों को हवा में गोलियाँ चलानी पड़ी। माना जाता है कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान के इलाक़े से ही चरमपंथी अफ़ग़ानिस्तान में घुस कर हमला करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ताज़ा घटना मध्यरात्रि के आसपास की है। उस समय सात अमरीकी हेलिकॉप्टर और दो चिनुक हेलिकॉप्टर ज़ोबा पर्वत श्रेणी के पास स्थित अफ़ग़ानिस्तान के पक्तिका प्रांत में उतरे। उसके बाद अमरीकी सैनिकों ने सीमा पार करने की कोशिश की. लेकिन जब वे ऐसा करने की कोशिश कर रहे थे, पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने हवा में गोलियाँ चलाईं.
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक़ उसके बाद अमरीकी सैनिक आगे नहीं बढ़े। ख़बरों के मुताबिक़ कई घंटों तक गोलियाँ चलती रही । पाकिस्तानी सेना के एक प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की है कि गोलीबारी हुई लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया कि इसमें पाकिस्तानी सैनिक शामिल थे ।
पिछले सप्ताह ये जानकारी मिली थी कि अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पाकिस्तान के अंदर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई को मंज़ूरी दी है और इसमें पाकिस्तान सरकार की स्वीकृति नहीं ली गई । पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तानी इलाक़ों में संदिग्ध चरमपंथी ठिकानों पर मिसाइल हमले हुए हैं। तीन सितंबर को अमरीकी हेलिकॉप्टर दक्षिणी वज़ीरिस्तान में उतरे थे। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इसका विरोध किया था ।

लालू यादव ने शिवराज पाटिल पर निशाना साधा

नई दिल्ली, १५ सितम्बर- रेल मंत्री लालू यादव ने सोमवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर राजधानी में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट के मामले में कड़ी कार्रवाई करने की मांग की और गृह मंत्रालय की अक्षमता पर क्षोभ व्यक्त किया।
यादव ने बम विस्फोट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस मामले पर सर्वदलीय बैठक तथा मंत्रिमंडल की विशेष बैठक बुलाने की प्रधानमंत्री से मांग की। बताया जाता है कि रेल मंत्री ने गांधी से कहा कि आतंकी घटनाओं के मामले में पाटिल की कार्यशैली के कारण सरकार की छवि खराब हो रही है। उन्होंने पाटिल की क्षमता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया और कहा कि गृह मंत्री को ऐसे मामलों में अपनी कार्यकुशलता का परिचय देना चाहिए। लालू यादव ने यह भी कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर आतंकवाद की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। इन घटनाओं से जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास घटता जा रहा है और वह खुद को काफी असुरक्षित महसूस कर रही है।
सूत्रों के अनुसार रेल मंत्री इस बात से चिंतित है कि अगर इस तरह आतंकी घटनाएं होती रही तो आने वाले चुनावों में संप्रग को नुकसान हो सकता है। यादव चाहते हैं कि इन घटनाओं का फायदा भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना जैसी पार्टियां न उठाएं।