Jul 11, 2008

हिरासत में मरे व्यक्ति को दिल्ली पुलिस नें भिखारी बताकर जलाया

नई दिल्ली, ११ जुलाई- पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की मौत को छिपाने के लिए पहले उसके शव को दूसरे थाने के क्षेत्र में फेंक दिया गया और बाद में शव को भिखारी व लावारिस बताकर बिना पोस्टमार्टम कराए उसका दाह संस्कार कर दिया गया। दिल्ली पुलिस की इस काली करतूत का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी में हुआ है। यह जानकारी एक समाज सेविका ने जुटाई है। आरटीआई के तहत ली गई जानकारी और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आधार बनाकर मृतक के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोषियों के खिलाफ हिरासत में हुई मौत का मामला दर्ज करने और मामले की जांच सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। साथ ही मुआवजा देने और गवाहों को संरक्षण देने की भी मांग की है। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस व अन्य को नोटिस जारी कर २८ अगस्त तक जवाब देने को कहा है।
न्यायमूर्ति एसएल भयाना की पीठ के समक्ष वकील आरडी राना ने बताया कि मादीपुर का रहने वाला टेकचंद इलाके की ही रामा हार्डवेयर दुकान में प्लंबर का काम करता था। २६ अगस्त २००७ को किसी बात को लेकर टेकचंद की दुकान में पिटाई कर दी गई, जिससे वह घायल हो गया। इसकी सूचना संजीव नामक राहगीर ने पुलिस को दी। इस बीच दुकान से भी एक कॉल पुलिस को की गई, जिसमें बताया गया कि एक चोर पकड़ा गया है। याचिका में कहा गया है कि टेकचंद को पुलिस की मदद से घायल हालत में मादीपुर पुलिस चौकी लाया गया। वहां भी आरोपितों के इशारे पर उसे पुलिस ने जमकर पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। इस बीच टेकचंद के परिजनों को पता चला कि टेकचंद को पुलिस चौकी ले जाया गया है। वे भी चौकी पहुंचे। वहां के इंचार्ज एसआई गगन भास्कर ने उन्हें बताया कि टेकचंद यहां से दस बजे चला गया। बाद में टेकचंद की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।
आरोप के अनुसार करीब छह महीने तक टेकचंद की मौत की बात पुलिस अधिकारी छिपाए रहे। बताया गया कि पुलिस हिरासत में हुई मौत को छिपाने के लिए मिलीभगत से लाश को लावारिस बता कर बिना पोस्टमार्टम कराए दाह संस्कार कर दिया गया। टेकचंद का शव थाना पश्चिम विहार इलाके से बरामद किया गया था। शव पर चोट के निशान भी पाए गए थे।
याचिका में कहा गया कि इस बात की जानकारी पूरे पश्चिमी जिला पुलिस को थी। वकील राना ने बताया कि जागृति महिला समिति की अध्यक्ष निर्मला शर्मा ने आरटीआई के तहत इस संबंध में दोनों कॉल्स के रिकार्ड व जिस लाश को भिखारी बता कर जलाया गया था, उसकी फोटो मांगी जुटाई है। जो फोटो उन्हें मिली है, वह टेकचंद के शव की है, जिस पर साफतौर से चोट के निशान मौजूद हैं।

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