Sep 20, 2008

छत्तीसगढ़ में मित्तल समूह ने बोली लगाई

मुंबई- २० सितम्बर- दुनिया के सबसे बड़े स्टील निर्माता आर्सेलर मित्तल की निगाहें अब छत्तीसगढ़ की लोहा खदानों पर हैं। प्रदेश के १० करोड़ टन लौह अयस्क भंडारों के खनन की निविदा प्रक्रिया में समूह ने बोली लगाई है। बोली मंजूर होने पर शर्त के तहत कंपनी ने स्टील प्लांट लगाने की भी रजामंदी दी है।
उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के लोहा और कोयला भंडारों पर है नजर : उड़ीसा और झारखंड में जमीन और खनन की अनुमति मिलने में देरी से वहां समूह अपनी योजनाओं पर अमल नहीं कर पाया। झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में देश का ७० फीसदी कोयला और ५५ फीसदी लौह अयस्क भंडार हैं।
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के वरिष्ठ प्रबंधक पी एस यादव ने बताया कि अन्य कंपनियों के साथ ही आर्सेलर मित्तल ने निगम के साथ उपक्रम में शामिल होने की पेशकश की है। अगले महीने तक निविदा प्रक्रिया पर फैसला कर लिया जाएगा।
लौह अयस्क भंडारों के मामले में भारत का दुनिया में पांचवां स्थान है। देश में स्टील प्लांट लगाने के लिए मित्तल समूह, पास्को सहित कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में जबर्दस्त होड़ चल रही है। एक खबर के मुताबिक छत्तीसगढ़ में ६० लाख टन का स्टील प्लांट लगाने पर मित्तल ३ अरब डालर का निवेश कर सकते हैं। हालाकि समूह के भारत में मुख्य कार्यकारी विजय कुमार भटनागर ने यह कहते हुए कोई ब्यौरा नहीं दिया कि अभी कुछ तय नहीं हुआ है।
वहीं देश के तीसरे सबसे बड़े स्टील निर्माता जेएसडब्ल्यू स्टील को आज झारखंड में लौह अयस्क के खनन की अनुमति मिल गई। कंपनी राज्य में ८ अरब डालर की लागत से प्लांट लगा रही है। उसने एक साल पहले लौह अयस्कों की खोज के लिए परमिट हासिल किया था। दुनिया के छठे बड़े स्टील निर्माता टाटा स्टील की छत्तीसगढ़ में २.३ अरब डालर में प्लांट लगाने की योजना है।
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में ५५० लाख टन स्टील का निर्माण किया जबकि चीन का स्टील उत्पादन ५३ करोड़ ५० लाख टन तक पहुंच गया।

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