Jun 29, 2008

असम में विस्फोट, 5 मरे, 35 घायल

निचले असम के बक्सा जिले में एक साप्ताहिक बाजार में रविवार को एक शक्तिशाली बम विस्फोट में तीन महिलाओं सहित पाँच लोग मारे गए तथा 35 अन्य घायल हो गए।
अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसी बाजार से दूसरा बम बरामद किया गया। जिले के तमुलपुर में कुमारीकाटा के भीड़ भरे बाजार में दोपहर करीब एक बजकर 10 मिनट पर बम विस्फोट हुआ, जिसमें पाँच लोग घटनास्थल पर ही मारे गए।
घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि गंभीर रूप से पाँच घायलों को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। इलाके में तनाव की स्थिति की बनी हुई है।

मावोवादियों नें जवानों की नौका पर किया हमला

नौका डूबने की आशंका
उड़ीसा-आंध्र प्रदेश के नक्सल रोधी बल और उड़ीसा पुलिस के लगभग ५० जवानों के संयुक्त दल उड़ीसा के दक्षिण स्थित मलकानगिरी जिले में बलिमेला जलाशय में डूबने की आशंका जतायी जा रही है । उपरोक्त दल जिस नाव में सवार था उसपर मावोवादियों नें गोलीबारी की जिसके कारण यह घटना घटी ।
उड़ीसा के पुलिस महानिदेशक गोपाल नंदा के अनुसार घटना आलमपेट्टा गाँव के पास उस समय घटी जब लगभग ६४ जवान मावोवादियों के खिलाफ एक संयुक्त अभियान हेतु जा रहे थे ।
खबर है कि नांव में सवार आठ जख्मी जवान तैरकर जलाशय के किनारे तक आने में सफल हो सके उन्हें अस्पताल में पहुंचा दिया गया है तथा अन्य लापता पुलिस कर्मियों के तलाशी के लिए अभियान जारी है ।
पुलिस महानिदेशक नंदा नें कहा है कि हम इस समय लापता जवानों की सही संख्या तो नहीं बता सकते । किंतु उन्होंने बताया कि तीन जवान चित्रकोडा पुलिस थाने के है मलकानगिरी जिले के पुलिस अधीक्षक एस० के० गजभिये नें कहा है कि अभी तक किसी भी जवान का शव नहीं मिला है किंतु तलाशी के दौरान दल को जलाशय के भीतर ४० मीटर गहराई से जवानों की टोपिया जरूर मिली है ।

आनंद शुक्ला उत्तर भारतीय एकता मंच के अध्यक्ष पद से हटाये गये

मुंबई- वर्षों पूर्व उत्तर भारतीयों के हित की लडाई लड़ने के उद्देश्य से बनाई गयी उत्तर भारतीय एकता मंच नामक संस्था में फूट पड़ गयी है संस्था के पदाधिकारियों का संस्था के अध्यक्ष पर मनमानी करने का आरोप है । पदाधिकारियों द्वारा संस्था के हिसाब-किताब का ब्यौरा मांगे जाने पर अध्यक्ष नें उन्हें सही जानकारी नही दिया परिणाम स्वरूप संस्था के लोगों नें पुराने अध्यक्ष को हटा कर उनके स्थान पर नये अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गयी है ।
संस्था के पदाधिकारियों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार उत्तर भारतीयों में मशहूर हिन्दी दैनिक अखबार यशोभूमी के संपादक आनंद शुक्ला महाराष्ट्र में रहने वाले सभी उत्तर भारतीयों को एक मंच पर लाने के लिए उत्तर भारतीय एकता मंच नामक संस्था का गठन किया था और वे उसके अध्यक्ष बने । संस्था में काम करने की उनकी भूमिका को लेकर बराबर नाराजगी बनी रहती थी । धीरे-धीरे मामला इतना बढ़ गया कि संस्था के लोगों नें आनंद शुक्ला को अध्यक्ष पद से हटा कर उनकी जगह पर दिनांक २४ जून २००८ को अशोक तिवारी को संस्था का नया अध्यक्ष बना दिया है ।
संस्था के जिलास्तरीय पदाधिकारी दिनेश गुप्ता नें खुशी व्यक्त करते हुए कहा है कि अशोक तिवारी के नेतृत्व में पहले की अपेक्षा यह संस्था अधिक विकास करेगी तथा उत्तर भारतीयों के प्रगती और कल्याण के लिए कार्य करेगी ।

Jun 28, 2008

शिवसेना ने साधा बीसीसीआई पर निशाना

शिवसेना ने शनिवार को बीसीसीआई पर भारतीय क्रिकेट के मानकों को बिगाड़ने के लिए निशाना साधा और इसके अध्यक्ष शरद पवार को भी आड़े हाथों लिया।
शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में एक संपादकीय में लिखा गया है कि क्रिकेट एक मानसिक रोग बन चुका है। उद्योगपतियों और धनवान राजनेताओं ने बुरी तरह से इसका शोषण किया है।
इसमें लिखा है कि क्रिकेटर हर दिन और अमीर होते जा रहे हैं, वहीं किसानों को दो वक्त की रोटी नहीं मिल पा रही है और वे आत्महत्या कर रहे हैं।
संपादकीय में चुटकी लेते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र के बेटे और केंद्रीय कृषिमंत्री पवार एक दैवीय व्यक्ति हैं। वे ऐसे हैं जिसने कभी बल्ला नहीं उठाया और फिर भी भारतीय क्रिकेट को चला रहे हैं।
संपादकीय के अनुसार जिस तरह से उन्होंने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को क्रिकेट से साफ कर दिया यह उनकी शक्तियों का एक और नमूना है। अब कोई भी डालमिया की बात नहीं कर रहा है।
इसमें कहा गया है कि खिलाड़ियों पर धन वर्षा में मुख्य भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मंत्री ने किसानों की समस्याओं को हल करके उन्हें आत्महत्या करने से रोकने के लिए थोड़ा ही काम किया है। संपादकीय कहता है धन वर्षा केवल क्रिकेटरों को लाभ पहुँचा रही है। इससे किसानों की आत्महत्याएँ नहीं रुक रही हैं।

थप्पड़ विवाद से सबक सीखा-हरभजन

तुनकमिजाज गेंदबाज हरभजनसिंह का कहना है कि इन्सान ही गलती करता है और वे भी इससे अलग नहीं है, लेकिन इस ऑफ स्पिनर ने साथ ही दावा किया कि उन्होंने टीम इंडिया के अपने साथी एस० श्रीसंथ के साथ हुए थप्पड़ विवाद से सबक सीखा है।
मोहाली में 25 अप्रैल को इंडियन प्रीमियर लीग मैच के बाद श्रीसंत को थप्पड़ मारने पर बीसीसीआई ने इस गेंदबाज पर पाँच एकदिवसीय मैचों का प्रतिबंध लगा दिया था। हरभजन ने अपनी नादानी स्वीकार की है और उनका मानना है कि गुस्से पर नियंत्रण रखने से उनकी परेशानी का हल निकल सकता है।
इस ऑफ स्पिन गेंदबाज ने एनडीटीवी से कहा कि ऐसी कई चीजें हैं जो मैं निश्चित तौर पर करूँगा, लेकिन हम सब इन्सान हैं और हम सब गलतियाँ करते हैं और उनसे सीखते हैं। अगर मेरे को गुस्सा कम आए तो उससे काफी कुछ समाधान हो जाएगा। यह सही है कि आपको कुछ करने से पहले सोचना चाहिए और इसके लिए पूरा समय लेना चाहिए।
अप्रैल 25 की घटना के बाद हरभजन के आईपीएल में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिससे उन्हें तीन करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसके बाद बीसीसीआई ने अलग से जाँच की और इस ऑफ स्पिनर पर पाँच एकदिवसीय मैचों का प्रतिबंध लगाया।
हरभजन ने इस पूरी घटना के लिए अपने जुनून और कभी हार न मानने वाले जज्बे को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मैं कभी मुसीबत में फँसने की योजना नहीं बनाता। मैं अपने खेल को लेकर काफी जुनूनी हूँ और मुझे अपने देश के लिए खेलना पसंद है। मैं काफी अधिक रम जाता हूँ, मैं जीतना चाहता हूँ, मैं सभी मैच जीतना चाहता हूँ और मैं मुश्किल हालातों में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूँ।
उन्होंने कहा कि मैं टीम के लिए हमेशा मौजूद रहना चाहता हूँ। मैं जरूरत पड़ने पर देश के लिए उपलब्ध रहना चाहता हूँ और जब आप पूरी तरह से रम जाते हैं तो आपको पता नहीं चलता कि आप क्या कर रहे हैं। पंजाब का यह स्पिन गेंदबाज इस पूरे विवाद को एक सबक के तौर पर लेता है और उनका मानना है कि भविष्य में इससे उन्हें मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। ये सब नहीं होता तो सीखने का मौका भी नहीं मिलता। यह सब भगवान का सिखाने का तरीका होता है। हरभजन का मानना है कि वे मानसिक रूप से इतने मजबूत हैं कि इस परेशानी से उबर जाएँगे।
हरभजन ने कहा कि मुझे लगता है कि कोई शक्ति है जो इस तरह की चीजों से निपटने में मेरी मदद करती है। जब मैं सिर्फ 19 बरस का था तब मुझे बायोमैकेनिक टेस्ट (संदिग्ध एक्शन के लिए) देना पड़ा। 2004-2005 में भी ऐसा ही हुआ। इन सब चीजों से उबरना मेरे लिए काफी मुश्किल था, लेकिन मैं हमेशा भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि मुश्किल परिस्थितियों में मेरी मदद करे।
प्रतिबंध खत्म होने के बाद श्रीलंका जाने वाली टीम से जुड़ने का इंतजार कर रहे हरभजन फिलहाल राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं एनसीए में अपने खेल पर कड़ी मेहनत कर रहा हूँ। साथियों के साथ मिलकर ट्रेनिंग करना काफी अच्छा है। मैं यहाँ गुजारे समय का लुत्फ उठा रहा हूँ और श्रीलंका दौरे के लिए बेताब हूँ।

शाहरुख के कार्यक्रम से पता लगा ठगों का

शाहरुख खान के क्विज कार्यक्रम ने फर्जी किटी ( कमेटी, फंड) का आयोजन कर 1।75 करोड़ रुपए ऐंठने वाले 4 लोगों का पता लगाने में पुलिस की मदद की।
यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब फर्जी किटी की सरगना की बेटी ने कार्यक्रम में एक प्रतियोगी के रूप में भाग लेते हुए इस बात का खुलासा किया कि उनके परिवार के सदस्य मुंबई में कहाँ रहते हैं।
पुलिस ने सरगना रेणु सेठी उसके पति अश्वनी कुमार और पुत्री श्रुति और गंधर्व के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक परिवार के सदस्य धोखाधड़ी करने के बाद अमृतसर से जाकर मुंबई में कहीं रहने लगे थे। इसके बारे में पुलिस को भनक भी नहीं लगती, यदि शाहरुख खान के क्विज प्रोग्राम में इसका खुलासा नहीं होता।
पुलिस ने बताया कि अमृतसर के रणजीत एवेन्यू में रहने वाली रेणु कथित रुप से निवेशकों से 1.75 करोड़ रुपए ऐंठने के बाद पिछले महीने अचानक गायब हो गई थी।

बाल ठाकरे भी उत्तर भारतीय!

ठाकरे के दादा ने आत्मकथा में स्वीकार किया था 'शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के पिताजी खुद रोजी-रोटी की तलाश में मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र आए थे, इसलिए उनके परिवार को मुंबई में आजीविका की तलाश में आने वाले किसी भी व्यक्ति की पिटाई करने का हक नहीं है।'
यह दावा पुणे विश्वविद्यालय की महात्मा फुले पीठ के चेयरमैन और आम्बेडकर के बारे में गहरे जानकार प्रोफेसर हरि नार्के ने राकांपा के मुखपत्र 'राष्ट्रवादी' में प्रकाशित अपने लेख में किया है। गौरतलब है कि राकांपा के प्रमुख शरद पवार शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के मित्र हैं। नार्के ने इस लेख में मनसे प्रमुख राज ठाकरे द्वारा उत्तर भारतीयों के खिलाफ जारी हमलों की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे को अपने दादा यानी कि बाल ठाकरे के पिता प्रबोधनकर ठाकरे की आत्मकथा पढ़नी चाहिए। प्रबोधनकर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उन्होंने मध्यप्रदेश में अपनी पढ़ाई की और फिर वे आजीविका के लिए कई राज्यों में घूमे। नार्के ने कहा कि इस आत्मकथा से साबित होता है कि मुंबई को अपनी बपौती समझने वाला ठाकरे परिवार मुंबई का मूल निवासी नहीं हैे।
लेख में कहा गया है कि प्रबोधनकर ठाकरे का साहित्य संयोग से 1995 में महाराष्ट्र सरकार ने नार्के की इजाजत से ही प्रकाशित करवाया था। नार्के ने सवाल उठाया है कि जो लोग दो पीढ़ियों पहले रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई आए उन्हें मुंबई में काम की तलाश में आने वालों की पिटाई का हक किसने दिया? नार्के ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि जो लोग 24 घंटे इतिहास में डूबे रहते हैं वे भला सिर्फ दो पीढ़ी पहले के इतिहास को कैसे भूल सकते हैं।