Oct 1, 2008

अभी नहीं मिलेगी समलैंगिकता को कानूनी वैधता

नई दिल्ली, १ अक्टूबर- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ अंबूमणि रामदास के समलैंगिकता को भारतीय दंड संहिता की धारा ३७७ से हटाने के अभियान को उस समय करारा झटका लगा जब सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से समलैंगिक सेक्स की अनुमति पर रामदास के विचार को दरकिनार करने का आग्रह किया।
इससे पहले भी गृह मंत्रालय दिल्ली उच्च न्यायालय में समलैंगिकता को इसी धारा के तहत रखने की जोरदार वकालत कर चुका है।
हाल ही में समलैंगिकता के बारे में पूछे जाने पर डॉ रामदास ने बताया कि वर्तमान समय और परिस्थितियों में समलैंगिकता को कानूनी वैधता देने के लिए इसे भारतीय दंड संहिता की धारा ३७७ से हटा दिया चाहिए।
उन्होंने समलैंगिकता की वैधता की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि इससे देश में बढ़ते एचआईवी एड्स संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
इसके ठीक विपरीत एडीशनल सालिसिटर जनरल पीसी मल्होत्रा ने अदालत में सरकार का समलैंगिकता के संबंध में रुख रखते हुए कहा कि समलैंगिकता से एचआईवी और एड्स तेजी से फैलेगा। उन्होंने कहा कि समलैंगिक सैक्स अनैतिक है और विकृत मानसिकता का परिचायक है। अगर इसे अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया तो यह समाज को पतन की ओर ले जाएगा।

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