Jun 28, 2008

बाल ठाकरे भी उत्तर भारतीय!

ठाकरे के दादा ने आत्मकथा में स्वीकार किया था 'शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के पिताजी खुद रोजी-रोटी की तलाश में मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र आए थे, इसलिए उनके परिवार को मुंबई में आजीविका की तलाश में आने वाले किसी भी व्यक्ति की पिटाई करने का हक नहीं है।'
यह दावा पुणे विश्वविद्यालय की महात्मा फुले पीठ के चेयरमैन और आम्बेडकर के बारे में गहरे जानकार प्रोफेसर हरि नार्के ने राकांपा के मुखपत्र 'राष्ट्रवादी' में प्रकाशित अपने लेख में किया है। गौरतलब है कि राकांपा के प्रमुख शरद पवार शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के मित्र हैं। नार्के ने इस लेख में मनसे प्रमुख राज ठाकरे द्वारा उत्तर भारतीयों के खिलाफ जारी हमलों की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे को अपने दादा यानी कि बाल ठाकरे के पिता प्रबोधनकर ठाकरे की आत्मकथा पढ़नी चाहिए। प्रबोधनकर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उन्होंने मध्यप्रदेश में अपनी पढ़ाई की और फिर वे आजीविका के लिए कई राज्यों में घूमे। नार्के ने कहा कि इस आत्मकथा से साबित होता है कि मुंबई को अपनी बपौती समझने वाला ठाकरे परिवार मुंबई का मूल निवासी नहीं हैे।
लेख में कहा गया है कि प्रबोधनकर ठाकरे का साहित्य संयोग से 1995 में महाराष्ट्र सरकार ने नार्के की इजाजत से ही प्रकाशित करवाया था। नार्के ने सवाल उठाया है कि जो लोग दो पीढ़ियों पहले रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई आए उन्हें मुंबई में काम की तलाश में आने वालों की पिटाई का हक किसने दिया? नार्के ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि जो लोग 24 घंटे इतिहास में डूबे रहते हैं वे भला सिर्फ दो पीढ़ी पहले के इतिहास को कैसे भूल सकते हैं।

अमरसिंह कानून से ऊपर नहीं-बसपा

बसपा ने कहा कि सपा महासचिव अमरसिंह या उनके रिश्तेदार कानून से ऊपर नहीं हैं और यदि उन्हें इस तरह की गलतफहमी हैं तो यह जल्द दूर कर लेना चाहिए।
बसपा ने सपा नेताओं के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें कहा गया है कि प्रदेश की वर्तमान सरकार जानबूझकर अमरसिंह को परेशान कर रही है। गौरतलब है कि गाजियाबाद नगर निगम ने सड़कों पर हो रही दुर्घटनाएँ रोकने के लिए वहाँ के सूर्यनगर इलाके के भवन स्वामियों को, जिनमें अमरसिंह के परिजनों का मकान भी शामिल है, अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से नोटिस जारी किए हैं।
बसपा का मानना है कि सपा नेताओं द्वारा प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक रंग देने के लिए इस तरह का बयान दिया गया है।
उप्र बसपा के प्रवक्ता की ओर से कहा गया है कि सूर्यनगर, गाजियाबाद में 600 से अधिक भवन स्वामियों को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
नगर निगम की इस कार्रवाई को किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करने की कार्रवाई बताना न सिर्फ बचकाना है, बल्कि बयान जारी करने वालों के मानसिक द‍िवालिएपन का भी सबूत है। सपा महासचिव अमरसिंह स्वयं को कानून से ऊपर मानने की मानसिकता के चलते मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मौत

पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले के उलुबेरिया क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज एक लॉरी की एक निजी वाहन से आमने-सामने की टक्कर होने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
पुलिस ने बताया कि मिदनापुर की ओर जा रहे एक निजी वाहन की कोलकाता जा रही लारी से आमने-सामने की टक्कर हो गई जिससे सात लोंगो की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि घायलों को उलुबेरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

परमाणु करार पर संशय बरकरार

भारत-अमेरिका परमाणु करार पर अपने रुख के बारे में समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते अभी तक छिपाए रखे हैं जबकि सरकार ने उम्मीद जताई है कि इस मुद्दे पर कायम गतिरोध का कोई स्वीकार्य समाधान ढूँढ़ लिया जाएगा। हालाँकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि सरकार करार पर आगे बढ़ेगी या नहीं।
लोकसभा में 59 सांसदों की ताकत वाले वाम मोर्चे का नेतृत्व कर रही माकपा ने करार का विरोध जारी रखते हुए प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया है कि उन्होंने ही इस मुद्दे पर देश को राजनीतिक संकट में धकेल दिया है।
आईएईए में भारत केन्द्रित सुरक्षा समझौते पर आगे बढ़ने या नहीं बढ़ने का फैसला करने से पहले सरकार और कांग्रेस सभी विकल्पों को पूरी तरह से तौल लेना चाहते हैं क्योंकि वाम दल आगाह कर चुके हैं कि परमाणु करार पर सरकार अगर आगे बढ़ी तो वह समर्थन वापस ले लेंगे।
उधर समर्थन वापस लेने की स्थिति में लोकसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण में अहम भूमिका निभा सकने की ताकत रखने वाली 39 सांसदों की सपा ने अभी तक अपने पत्ते छिपाए रखकर सरकार के भविष्य पर संशय को बनाए रखा है।
मुलायमसिंह ने लखनऊ में कहा कि तीन जुलाई को यूएनपीए की बैठक के बाद पार्टी इस बारे में अपने रुख को स्पष्ट करेगी। उन्होंने कहा कि परमाणु करार के मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से अभी तक उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया है।
हालाँकि कांग्रेस के प्रति नरम रुख अपनाने संबंधी सभी सवालों को जवाब में उन्होंने उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार को निशाना बनाकर संकेत दिया कि उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ रिश्तों में गरमाहट लाने के विचार के खिलाफ नहीं है।
कहा जाता है कि सपा इस प्रयास में पिछले दरवाजे से कांग्रेस के साथ वार्ता का सिलसिला चला भी रही है। खासकर मायावती की बसपा द्वारा संप्रग सरकार से समर्थन वापस ले लेने के फैसले के बाद दोनों दलों के बीच रिश्तों में गरमाहट लाने की सरगर्मियाँ बढ़ गई हैं।
सपा के अन्य वरिष्ठ नेता अमर सिंह इन दिनों विदेश यात्रा पर हैं। उम्मीद है कि कुछ दिन बाद उनकी स्वदेश वापसी पर इस संदर्भ में पार्टी की स्थिति में और स्पष्टता आएगी।

मनमोहन सिंह योग्य प्रधानमंत्री-सोनिया

परमाणु करार को लेकर संप्रग-वाम गतिरोध के लिए माकपा द्वारा प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराए जाने के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उनकी सराहना करते हुए उन्हें योग्य नेता बताया और कहा कि उनका काम ही यह स्पष्ट करता है।
सोनिया ने पिछले चार साल में प्राप्त उपलब्धियों के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार की उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई देने में मुझे कोई झिझक नहीं है।
उन्होंने कहा कि बहुधा ऐसा नहीं होता कि किसी नेता का काम ही उसके बारे में बोले। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सरकार की उपलब्धियों के बारे में लोगों को बताएँ।

खत्म नहीं हुई सिर पर मैला ढोने की प्रथा

सिर पर मैला ढोने की प्रथा के उन्मूलन के लाख दावों के बावजूद हालत यह है कि देश के कई राज्यों में यह प्रथा मौजूद है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने अपने अध्ययन में पश्चिम बंगाल के सफाई कर्मचारियों की हालत को देश में सबसे बदतर बताते हुए कहा है कि वहाँ स्थायी सफाई कर्मचारी मैला ढोने को मजबूर हैं और उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जाता। आयोग की अध्यक्ष सुश्री संतोष चौधरी ने बताया कि इस संबंध में केंद्र द्वारा राज्यों को अरबों रुपए दिए जा चुके हैं, लेकिन समस्या समाप्त नहीं हो पाई है।
बंगाल बेहाल : पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए सुश्री चौधरी ने कहा कि लाखों लोगों का मैला साफ करने वाले राज्य के सफाई कर्मचारियों के साथ पूरा न्याय नहीं किया जा रहा है। वहाँ अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी सफाई कर्मचारी तक मैला ढो रहे हैं और उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जाता।
आयोग के अनुसार प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने अब 31 मार्च 2009 तक देश से इस प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले इसके लिए 31 दिसंबर 2007 तक का समय निर्धारित था।

रियलटी शो की प्रतियोगी शिंजनी कोमा में

कोलकाता-बाँग्ला नृत्य के एक रियलटी शो में जजों की फटकार सुनने के बाद शिंजनी नामक लडकी जिसकी उम्र १६ वर्ष है ( जो इस कार्यक्रम में प्रतिभागी थी ) कोमा में चली गयी शिंजनी को शो के दौरान शो में मौजूद जजों नें उसे बुरी तरह अपमानित किया तथा शिंजनी इसका सदमा बर्दास्त नहीं कर पायी ।
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस कार्यक्रम से निकलने के बाद उसकी तवियत बिगड़ने लगी और वो पूरी तरह से कोमा में चली गयी । अब न तो वह बोल पा रही है और न ही हिल-डुल पा रही है ।
१९ मई को शो के जजों की फटकार सुनने के बाद उसने इसके बारे में पहले किसी को भी नहीं बताया । लेकिन दुसरे दिन उसे एक बांग्ला धारावाहिक में काम करना था । धारावाहिक के सूटिंग के दौरान वो अपना डायलांग भूल जा रही थी परिवार वालों के पूछनें पर उसने शो में जजों के फटकार और अपमानित करने के बारे में बताया ।
शिंजनी का बंगलूर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है । शिंजनी के माता-पिता उसके इस हालत के लिए जजों को जिम्मेदार ठहरा रहे है उसकी माँ शिंवनी सेनगुप्ता का कहना है कि यह शो के जजों के कारण हुआ है । मनोचिकित्सकों का कहना है कि जजों के द्वारा अपमानित किए जाने के कारण उसे ग़हरा सदमा लगा है और वो इस सदमे को बर्दास्त नहीं कर पायी परिणाम स्वरूप शिंजनी कोमा में चली गयी ।